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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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पानी

पानी

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यूं तो हम कई बार मिल लेते हैं

 पर जाने क्यों हर मुलाकात

 कुछ नया बतलाती है।

 परतों की परतें खुल जाती हैं।

 जिंदगी भर उल्टे गिलास में पानी भरा ।

 फिर कैसे हो कुछ भी भला।


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