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Bindiya rani Thakur

Abstract

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Bindiya rani Thakur

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नयी खुशियाँ

नयी खुशियाँ

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कुछ कड़वे एहसास दिल से दूर होने लगे हैं 

सहरा में ज्यों उम्मीद के फूल खिलने लगे हैं

तमन्नाओं की बारिश में भीग-भीग जाता मन 

खुद से मिल अपनी शख्सियत संवारने लगे हैं 


 उदासियों का ये दौर खत्म होने को है 

 खुशियों का खूबसूरत दौर आने को है 

 बहुत डराया था उन अंधेरों ने हमें 

 अब एक नयी- सी सहर होने को है


*सहरा-रेगिस्तान 

*सहर-सुबह 


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