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कल्पना रामानी

Abstract

5.0  

कल्पना रामानी

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नवेली ओस की बूँदें

नवेली ओस की बूँदें

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सुनहरी भोर बागों में, बिछाती ओस की बूँदें!

नयन का नूर होती हैं, नवेली ओस की बूँदें!


चपल भँवरों की कलियों से, चुहल पर मुग्ध सी होती

मिला सुर गुनगुनाती हैं, सलोनी ओस की बूँदें!


चितेरा कौन है? जो रात, में जाजम बिछा जाता

न जाने रैन कब बुनती, अकेली ओस की बूँदें!


करिश्मा है ख़ुदा का या, कि ऋतु रानी का ये जादू

घुमाकर जो छड़ी कोई, गिराती ओस की बूँदें!


नवल सूरज की किरणों में, छिपी होती हैं ये शायद

जो पुरवाई पवन लाती, सुधा सी ओस की बूँदें!

 

टहलने चल पड़ें साथी, निहारें रूप प्रातः का

न जाने कब बिखर जाएँ, फरेबी ओस की बूँदें! 


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