monika kakodia
Abstract
बीती रात कमल दल फूले
हरित बेल पर ओस के झूले
भोर भयी उस ओर शितिज पर
नव जगत ने फिर नैना खोले
कोयल पपीहा ने कुह लगाकर
कन्ठ से जग में मिष्ठी घोले
नव प्रभात है नई उम्मीदें
हम भी अब नव पथ होलें
बिसरा सारे अंधियारे को
नव प्रकाश से नाता जोड़ें।
सब लड़कियाँ
जल
बून्द बून्द अ...
प्रकृति
ऐ शाम
पर्यावरण बचान...
शाम का इंतिज़ा...
परिवेश
माँ
पहला प्यार
हे मेरे ईश्वर हे मेरे ईश्वर सुन ले बस..एक यही अरज उमंग। हे मेरे ईश्वर हे मेरे ईश्वर सुन ले बस..एक यही अरज उमंग।
दान पुण्य उड़ाकर पतंग मनाते मकर संक्रांति का त्यौहार। दान पुण्य उड़ाकर पतंग मनाते मकर संक्रांति का त्यौहार।
कह रही है इक वीरांगना, मुझसे मेरी भू मत माँगना। कह रही है इक वीरांगना, मुझसे मेरी भू मत माँगना।
हर कोई तो बन्दे तेरे प्रभु जीव जंतु पेड़ पौधें या इंसान।। हर कोई तो बन्दे तेरे प्रभु जीव जंतु पेड़ पौधें या इंसान।।
पर एक ही सवाल मन में आया, आखिर हमें हुआ क्या है ? पर एक ही सवाल मन में आया, आखिर हमें हुआ क्या है ?
ठंड नहीं है, फिर जला अलाव, उस पर हाथ सेंकना क्या।। ठंड नहीं है, फिर जला अलाव, उस पर हाथ सेंकना क्या।।
तुम हालातों की भट्टी में… जब-जब भी मुझको झोंकोगे… तब तपकर सोना बनूंगा मैं… तुम हालातों की भट्टी में… जब-जब भी मुझको झोंकोगे… तब तपकर सोना बनूंगा मैं…
प्यार तुझसे ही करूं और सब तो धोखा है। प्यार तुझसे ही करूं और सब तो धोखा है।
जो उसकी बख्शी मासूमियत से, जीवन के हर पल को संभाल ले जाता है। जो उसकी बख्शी मासूमियत से, जीवन के हर पल को संभाल ले जाता है।
आशिक है तू ज़िंदगी का अगर निभाता क्यों नहीं आशिकाना। आशिक है तू ज़िंदगी का अगर निभाता क्यों नहीं आशिकाना।
वह भी थे, एक माँ की संतान, उनके भी थे कुछ अरमान। वह भी थे, एक माँ की संतान, उनके भी थे कुछ अरमान।
जैसे-जैसे, एक-एक करके, घड़ी बीतती जा रहीं थी, जैसे-जैसे, एक-एक करके, घड़ी बीतती जा रहीं थी,
सुलझा सकता है क्या कोई पाठक, उलझन मेरी ? सुलझा सकता है क्या कोई पाठक, उलझन मेरी ?
मीरा, प्रेम की वीणा पर गाती । मन हो कृष्णमय प्रेम में रोता है।। मीरा, प्रेम की वीणा पर गाती । मन हो कृष्णमय प्रेम में रोता है।।
जो अपने जीवन को रेत की तरह फिसलता देख रही है जो अपने जीवन को रेत की तरह फिसलता देख रही है
मासूमियत से भरे खैर के क़ासिद आबाद लगें मासूमियत से भरे खैर के क़ासिद आबाद लगें
पीले सरसों के फूल जीवन के बहुरंगी खुशिया लोहड़ी रंग अनंत।। पीले सरसों के फूल जीवन के बहुरंगी खुशिया लोहड़ी रंग अनंत।।
इन फूलों की तरह तुम... मुस्कुराकर तो देखो। इन फूलों की तरह तुम... मुस्कुराकर तो देखो।
होते नहीं जिनके ये पूछो उनसे अंतर्मन उनके कितने खिन्न हैं होते नहीं जिनके ये पूछो उनसे अंतर्मन उनके कितने खिन्न हैं
लौटकर तू आजा एक बार सही ग़म-ए-जुदाई अब कर दे तू ख़त्म। लौटकर तू आजा एक बार सही ग़म-ए-जुदाई अब कर दे तू ख़त्म।