monika kakodia
Abstract
बीती रात कमल दल फूले
हरित बेल पर ओस के झूले
भोर भयी उस ओर शितिज पर
नव जगत ने फिर नैना खोले
कोयल पपीहा ने कुह लगाकर
कन्ठ से जग में मिष्ठी घोले
नव प्रभात है नई उम्मीदें
हम भी अब नव पथ होलें
बिसरा सारे अंधियारे को
नव प्रकाश से नाता जोड़ें।
सब लड़कियाँ
जल
बून्द बून्द अ...
प्रकृति
ऐ शाम
पर्यावरण बचान...
शाम का इंतिज़ा...
परिवेश
माँ
पहला प्यार
मत भूलिए हुज़ूर, लगाम आपके हाथ में है। मत भूलिए हुज़ूर, लगाम आपके हाथ में है।
तन्हाइयों में अक्सर खुद से बात कर लेता हूं। तन्हाइयों में अक्सर खुद से बात कर लेता हूं।
जिनका परिवार होता है उनका सुखी संसार होता है। जिनका परिवार होता है उनका सुखी संसार होता है।
बनाता है दिल को प्रसन्न वही है देश का हीरा बनाता है दिल को प्रसन्न वही है देश का हीरा
कभी चांद फिर कभी चांदनी कहलाती। कभी चांद फिर कभी चांदनी कहलाती।
जिंदगी के इम्तहान में साथ नहीं देते और हम जीना इनके बिना सीख जाते हैं। जिंदगी के इम्तहान में साथ नहीं देते और हम जीना इनके बिना सीख जाते हैं।
नीली छत वाले से उसकी छत मांग लेता हूँ। नीली छत वाले से उसकी छत मांग लेता हूँ।
ये ही तो पालनहार हमारे देव तुल्य पिता हमारे। ये ही तो पालनहार हमारे देव तुल्य पिता हमारे।
लिखा पता ना लिखी है तारीख देश-काल की यही है सीख। लिखा पता ना लिखी है तारीख देश-काल की यही है सीख।
खतरे में है, बालक तेरे, दानव हमारे है सिर पे खड़ा है ईश्वर! मेरे सखा, एक तु ही है आसरा। खतरे में है, बालक तेरे, दानव हमारे है सिर पे खड़ा है ईश्वर! मेरे सखा, एक तु ही...
प्यार एक एहसास जो केवल .. महसूस किया जा सकता प्यार एक एहसास जो केवल .. महसूस किया जा सकता
जब तक हो अपनों का साथ बस तब तक आबाद है जिंदगी। जब तक हो अपनों का साथ बस तब तक आबाद है जिंदगी।
ये आंसू जो खुशी में मुस्कुराते हैं गम में दामन भिगो जाते हैं। ये आंसू जो खुशी में मुस्कुराते हैं गम में दामन भिगो जाते हैं।
बेजुबान भी जो है बोल पाए यही तो है प्यार की भाषा। बेजुबान भी जो है बोल पाए यही तो है प्यार की भाषा।
फिर भी वो ही कृतघ्न लोग मौका पाकर हमें ही आजमाते हैं। फिर भी वो ही कृतघ्न लोग मौका पाकर हमें ही आजमाते हैं।
सुना है सदियों पहले,थे हम जानवर पथ प्रगति चले, बनके आदमी। सुना है सदियों पहले,थे हम जानवर पथ प्रगति चले, बनके आदमी।
त्याग, सेवा ही धर्म है प्रजा-हित ही राज धर्म। त्याग, सेवा ही धर्म है प्रजा-हित ही राज धर्म।
ये ज़िन्दगी का खेल है नियम अजीब हैं यहाँ के ये ज़िन्दगी का खेल है नियम अजीब हैं यहाँ के
प्यार में शर्त नहीं होती नफा- नुकसान नहीं होता। प्यार में शर्त नहीं होती नफा- नुकसान नहीं होता।
ज़िंदगी किताबों से हटाकर जी जाए। ज़िंदगी किताबों से हटाकर जी जाए।