STORYMIRROR

monika kakodia

Abstract

2  

monika kakodia

Abstract

नव प्रभात

नव प्रभात

1 min
407

बीती रात कमल दल फूले

हरित बेल पर ओस के झूले


भोर भयी उस ओर शितिज पर

नव जगत ने फिर नैना खोले


कोयल पपीहा ने कुह लगाकर

कन्ठ से जग में मिष्ठी घोले


नव प्रभात है नई उम्मीदें

हम भी अब नव पथ होलें


बिसरा सारे अंधियारे को

नव प्रकाश से नाता जोड़ें।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract