STORYMIRROR

Phool Singh

Inspirational

4  

Phool Singh

Inspirational

नन्ही परी

नन्ही परी

1 min
172


स्वर्ग से ऊतर मेरी चौखट आयी

घर को मेरे स्वर्ग बनाई

मान, लाज, शर्म की बनी पोटली

हृदय कमल में वही समाई।।


सूना था बिन उसके आँगन

खुशियों की लडियाँ वही लगाई

प्यारी सी मेरी बन लाड़ली

भूधरा से मुझको स्वर्ग दिखाई।।


भेद मिटाती बेटे-बेटी का

रूढिवादिता वही मिटाई

सेवा करती मात-पिता की

जब बेटों से धुत्कार उन्होने पाई।।


कौन कहता है बेटी

अपनी नही सदा होती पराई

ध्यान से देखों तो पता चले

सदा, दिल में होती वही समाई।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational