नमामि मातु नर्वदे
नमामि मातु नर्वदे
नर्वदा सर्वदा कल्याणी जीवन दायनी पतित पावनी नमामि मातु नर्वदे ।।
अमर कंटक पठार से उद्गम ओंकारेश्वर पद पंकजा नमामि मातु नर्वदे ।।
निर्मल निर्झर धारा अविरल कर्म किसान भारत जीवन प्राण नमामि मातु नर्वदे ।।
मोक्ष दायनि मंगल करनी पाप शाप विनाशिनी नमामि मातु नर्वदे।।
रेवा वैदिक नाम तुम्हारा कलयुग नर्वदा नाम विख्यता तेरी धारा का कंकण कंकण शंकर नमामि मातु नवर्दे।।
नर्वदेश्वर महादेव सी पूजी जाती शिव काया तप ताप पसीने से जन्मी नमामि मातु नर्वदे।।
प्रेम परित्याग पश्चिम से पूरब को चलती बहती कलरव करती नमामि मातृ नर्वदे ।।
राजा हिरण्यतेजा चौदह हज़ार वर्षों तक घोर तपस्या शिव प्रसन्न शिव से
वर में तुझको ही मांगा नमामि मातु नर्वदे ।।
मगरमच्छ आरूढ़ उदयाचल पर्वत पर अविरल निर्मल बहती
मध्यप्रदेश गुजरात की जीवन रेखा बनती नमामि मातृ नर्वदे।।
उद्गम नर्मदाकुण्ड प्रसिद्धि पाई ताप्ती संग संग है चलती सतपुड़ा विंध्य पर्वतमाला सीमाओं में बहती नमामि मातृ नर्वदे।।
तिलवारा जबलपुर ओंकारेश्वर भेड़ा घाट सोनमुडा उतरती कपिलधारा जल प्रपात बनती नमामि मातृ नर्वदे।।
नर्वदा तट संगमरमर चट्टान नर्वदापुरम बरखारा पहाड़ियों में समाहित अवसान विराम नमामि मातु नर्वदे।।
आदिगुरु शंकराचार्य गुर भगवत्पाद से नर्वदा ओंकारेश्वर पर मिलन साक्ष्य तू बनती नमामि मातु नर्वदे।।
तेरी परिक्रमा मोक्ष पाप कि मुक्ति अमरकंटक से सोलह सौ मील तीन वर्ष तीन माह तेरह दिन के
पद विपरीत परिक्रमा कि महिमा तेरी नमामि मातृ नर्वदे।।
