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Sanjeeb Kumar Nag

Romance Tragedy

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Sanjeeb Kumar Nag

Romance Tragedy

नजर नहीं आती

नजर नहीं आती

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एक झलक देखने को मुझे

तेरी वह बेचैनी अब नज़र नहीं आती

एक बार मिलने को मुझे

तेरी वह तड़प अब नज़र नहीं आती

किसी और दिशा मे

बह रही है शायद तेरी तड़प की झरना

इसीलिए तो अब मेरी प्यास नही बुझती।


मैं तो पड़ा हुआ था

शुखे पौधे की तरह इसी बंजर जमीन पर

तूने ही तो जान फूंका था

प्यार की बारिश करते हुए सीने मे धड़कन बनकर


अरे कब का यह पौधा मर गया होता 

अगर तू पानी डाली ना होती

अब जब जीने लगा था यह पौधा

तो तेरी बेचैनी और तड़प की झरने नज़र नहीं आती।


क्या तू अब भी समझ नहीं रही है

की रात को मुझे नींद क्यों नहीं आती

बस यही फरक है तेरी और मेरी रातों मे

तेरी सो के गुजरती है और मेरी रो के

फिर भी मेरी प्यार की गहराई तुझे नजर नही आती।


पौधे के पत्ते फिर से मुरझाने लगे हैं

बस कहीं से एक हवा के झोंके आये तो टूट कर बिखर जाएंगे

बारिश की एक बूंद की तलाश है

वक़्त कम है लेकिन जीने की चाह है

फिर भी मेरी आशाएं की गगन पर

तेरी प्यार की बादल नज़र नहीं आती।


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