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"Komal" Deriya

Romance


4  

"Komal" Deriya

Romance


नियति की कलम से ...

नियति की कलम से ...

2 mins 205 2 mins 205

नियति की कलम से मुलाकात लिखी थी, 

अचानक उस रोज मे तुमसे मिली नही थी, 

बिछडना हमारा शायद किस्मत होती

पर तू कभी तकदीर को मानती नही थी,

हर रोज पास रहते थे हम दोनो मगर

हकीकत ये थी की तु मेरे साथ नही थी, 

ख्वाब मेरे तुझसे जुडे हुए थे तब भी

कभी मैं उसे देखने चैन से सोई नही थी,

मेरी मंज़िल तो मिलेगी मुझे मगर

गम इस बात का है की

मेरी मंज़िल का रास्ता तू बनी नहीं थी, 

सोचती थी चैन से सो जाऊ आँचलमे तेरे

पर अफ़सोस 

मै उस लायक कभी तुझे लगी नहीं थी,


बिछडने का गम हम बया कर ना सके

क्योंकि तू इस प्यारको मानती नहीं थी, 

काश हम तुझे मिल पाये इस जनम में

करनी है वो बात जो हमने

आखरी मुलाकात पे तुम्हें बताई नहीं थी,

आज भी तुम वजह हो मेरी हंसी की

गम का कारण तू कभी बनी नहीं थी, 

प्यारका मतलब खोजते थे हम तब

जब तू मेरी जिंदगी में शामिल नहीं थी,

अब हमे सब अच्छा लगता है क्योंकि 

भुले नही हम वो बाते

जो तुने हमे गुस्से से समजाइ थी, 

फिलहाल तो अलग है मेरी जिंदगी 

तेरे आने से पहले इतनी हसीन नहीं थी, 

जबभी मन उदास हो गाना सुनती हुं

पहले ऐ मेरी आदत कभी नहीं थी, 

तुझसे जुडी हर बात प्यारी लगती है

पहले मे ऐसी पागल तो नही थी, 

तू साथ है यह काफी है जीने के लिए 

तुझे पाने की मेरी तमन्ना भी नहीं थी,

बस ऐसे ही मुस्कराते रहना तुम

मेरी चाह तुझे परेशान करने की नहीं थी, 

मे तेरी आँखों की दीवानी हुं नखरेवाली

तुझे देखते रहने की और कोइ वजह नहीं थी,

नियति की कलम से मुलाकात लिखी थी 

अचानक उस रोज मे तुमसे मिली नही थी।


नियति की कलम से मुलाकात लिखी थी 

अचानक उस रोज मे तुमसे मिली नही थी,

शायद तुझसे जुडी हुई थी किस्मत मेरी

वरना मे पहले कभी यु लडखडाई नहीं थी, 

बिछडना हमारा समय की करामत होगी

वरना मुहब्बत तो हमारी अधुरी नहीं, 

याद करना तुम्हें हमारा काम बन गया है

पर पहले ऐसी कभी मैरी आदत नहीं थी, 

मे तेरे नाम को लिख तो दूं इस कलम से

पर तू कभी मेरी कविता सी नहीं थी, 

तारीफ़ तो तेरी हर वक़्त मैं करती हुं

पर मे तेरे मन की खुशबू समझी नहीं थी, 

मेरी हर खुबसुरत गजल कि प्रेरणा हो तुम

वरना पहले किसीने उसे चाव से पढी नही थी, 

तेरी हर बात याद है मुझे समीकरण सी

वरना मैं गणित के अलावा किसीकी नहीं थी, 

प्यार मे हमने बहुत जी ली अपनी जिंदगी 

जैसी मजेदार हमने जीने की सोची नहीं थी, 

तेरी आँखों में शामिल हों जाना चाहते थे

तुझे परेशान करना मेरी फ़ितरत नहीं थी, 

छोड देते है फ़रियाद करना आज तुमसे

घायल होना प्यार मे बड़ा खुशी देता है

इसलिए उससे भागना मेरी ख्वाईश नहीं थी,

तू चाँद सी चमकती रहना आसमान में

वैसे भी मेरी तुझे छुने की औकात नहीं थी, 

नियति की कलम से मुलाकात लिखी थी 

अचानक उस रोज मे तुमसे मिली नही थी।


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