निशा चलो
निशा चलो
निशा चलो हम बढ़े
कोई सोया हम चले
प्रकाश की खोज में
आकाश सा जीना है
तुम थोड़ा आगे बढ़ो
तभी कुछ होना है
जैसे ही तुम काली होगी
सन्नाटा गहरा होगा
उसमें पीड़ा भी होगा
ढेरों आवाजें सुनोगी
रोने का चिल्लाने का
लेकिन घबराना नहीं
चलते रहना, थकना नहीं
जो थका सो हारा
जो चला सो जीता
दुख के पल थोड़े हैं
वह बीत जाएगा
बस चलते रहो
सवेरा तेरा मिल जाएगा
सूरज तेरा खिल जाएगा।
