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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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निंदिया जल्दी से आना

निंदिया जल्दी से आना

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निंदिया जल्दी से आना।

 पलकों के पीछे छिप जाना। 

 सपनों में ढूंढेंगी, लुका-छिपी खेलेगी।

आ के तू सुला जाना।

 ममता का आंचल 

राजदुलारी को ओढ़ाकर ।

आंखों में ही सो जाना ।

निंदिया तू जल्दी से आना।

बादलों में फिर न छुप जाना 

हौले हौले तू आना।

फिर न जल्दी मचाना।

बड़ी देर तक रहना।

परियों को भी लाना।

सपनों का बिछौना सजाना।

दूर तक ले जाना।

बादलों में दौड़े, बारिश के झमेले।

छाते को न लाना, नए कपड़े भर ले आना।

चंदा मामा आ गए, निंदिया तू भी जल्दी से आना।  

 सूरज के आने से पहले, रात सुहानी दे जाना।

निंदिया तू जल्दी आना।


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