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PRATAP CHAUHAN

Abstract

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PRATAP CHAUHAN

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नगमा

नगमा

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पल भर ही मुस्कराना,

         उनकी शराफत बन गयी है।

बेवक्त रूठ जाना,

         उनकी नजाकत बन गयी है।।

उनकी हर कहानी,

          अब बेइमानी बन गयी है।

खामोशियां भी उनकी,

           अब कयामत बन गयी हैं।।



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