नदी के पास बैठकर लिखना
नदी के पास बैठकर लिखना
नदी की बहती धारा को
निहारना अच्छा लगता है,
और नदी के किनारे बैठकर
लिखने का मौका मिले तो
वाह क्या है बात!
ब्रह्मपुत्र नदी से मेरा है विशेष लगाव,
नदी के संग बात करने का भी करती हूं प्रयास,
मौन रहकर भी नदियां मानों सब कुछ समझती हैं,
लेकिन क्या हम नदियों का दर्द समझते हैं?
शायद नहीं!
नहीं तो क्या हम उन्हें प्रदुषित करते?
शहरी जीवन के कारण
नदियां संकुचित हो रही हैं,
जो हमारे जीवन के लिए ही
शंका का विषय है, इसलिए
नदियों का संरक्षण बेहद जरूरी है।
