नायक
नायक
नायक का किरदार जीवन के रंगमंच पर शुरू होकर,
मृत्यु शय्या पर ख़त्म होता है।
कर्म ही नायक या खलनायक का मापदंड है,
जीवन के आदर्श नायक हैं रामायण के राम,
जीवन के व्यवहारिक नायक हैं हमारे श्याम ,
देश के नायक हैं वे सैनिक जो हो गए मातृभूमि पे कुर्बान,
हमारा अपना नायक है हमारे अंदर का इंसान।
