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J P Raghuwanshi

Inspirational

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J P Raghuwanshi

Inspirational

"नारी"

"नारी"

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नारी त्याग की मूरत है,

करै रात-दिन काम।

नारी न होती जगत में,

होता काम तमाम।


नारी बेटी के रूप में,

करै पिता का नाम।

दोनों कुलों का मान बढ़ावें,

देखें सुबह न शाम।


पत्नी के रूप में जब नारी,

अपने कर्तव्य निभाती है।

पिता के घर के साथ-साथ,

पति के घर को सजाती है।


वहन के रूप में तो नारी,

प्रेम की गंगा बहाती है।

हर सावन,पर कभी न चूके,

भैया की बांह सजाती हैं।


मां के रुप में नारी के,

रूप के बारे में क्या कहना।

जन्म देती बेटों को,

झुलावें वात्सल्य का पलना।।


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