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Santosh mishra

Abstract

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Santosh mishra

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नारी का महत्व

नारी का महत्व

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अभिनंदनीय पूजनीय वंदनीय है नारी,

जिससे होती है दुनिया की रंगत सारी !


मां जगदम्ब के रूप में रखती है यह पावन स्वरुप,

तो मां काली के रूप में रखती है रणचंडी का रूप!


बेटी से लेकर पत्नी तक की होती है

इसके ऊपर हर जिम्मेदारी,

लेकिन, कोई बताएगा कि कब

आएगी इसके सपनों की बारी!

सपने देखना तो यह जानती है,

और जानती है अनंत आकाश में उड़ जाना,


हर किसी की खुशियों को है इसने जाना,

पर कभी न इसने अपने आप को पहचाना!

बड़ा निंदनीय है, कुछ लोगों के कारण

इसके सपनों का टूट जाना,


रंग बिरंगे सपनों का बिखर कर

सिर्फ और सिर्फ घर पर रह जाना!

चाहती है ये स्वाभिमान से जीना,

चाहती है ये पूरे युग को बदलना !


अब जमाने के साथ-साथ नारी भी बदल चुकी है,

अपनों के अलावा खुद के लिए भी जीना सीख चुकी है !


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