नामुमकिन है
नामुमकिन है
तुम दस्तक दो मैं बाहर ना आऊँ, ऐसा नामुमकिन है।
तुम हाथ बढ़ाओ मैं अपना हाथ ना दूँ नामुमकिन है।
मुमकिन है हर चीज जो तुम प्यार से कहोगे।
ग़र दिखाया रौब तो सोचो मुमकिन ये भी है मैं एक आंख तुम्हें ना देखूँ।
मेरा वजूद भी बनाकर रखूंगी, पर तुम्हारे प्यार का भी मान है।
लेकिन सुनो मैं बस प्यार की भाषा समझती हूँ। ये मेरा स्वभाव है।
तुम दस्तक दो प्यार से और मैं दरवाजा ना खोलूँ नामुमकिन है।
तुम्हारे प्यार भरे जज्बात ना समझूँ नामुमकिन है।

