भलाई का ज़माना नहीं
भलाई का ज़माना नहीं
ज़माना अच्छा है बुरा है जैसा भी है
तुम्हें उसे निभाना ही होगा।
बनना है जो समाज का हिस्सा तुम्हें
उसका हर रंग अपनाना ही होगा।
यहाँ गिरगिट से तेज होते हैं लोग
तो थोड़ा चतुराई का हुनर तुम्हें भी लाना ही होगा।
समझो तुमने की किसी की भलाई तो
बाद में उसी के हाथ से जूता खाना ही होगा।
फिर समझोगे के दुनिया क्या चीज है
और इस दुनिया को कैसे निभाना होगा।
भलाई छोड़कर सब करना वरना बहुत
पछताना पड़ेगा।
