ranjeet gaikwad
Tragedy
ना जाने क्यों टूटा हुं मैं
सारी दुनिया से रूठा हुं मैं
दिल सच्चा है, लेकिन ज़माने के लिए झूठा हुं मैं
आज फिरसे गीरकर अपने पैरों पर उठा हुं मैं
ना जाने
अपने देख रहे हैं रस्ता, खुशियों से तू झोली भरले।। अपने देख रहे हैं रस्ता, खुशियों से तू झोली भरले।।
कुदरत ने कैसा कहर ढाया फिर से हुआ बहुत बिगाड़ा। कुदरत ने कैसा कहर ढाया फिर से हुआ बहुत बिगाड़ा।
कागज़ पर ज़िंदगी मेरी गुलिस्तां-ए- ग़जल बन गई...! कागज़ पर ज़िंदगी मेरी गुलिस्तां-ए- ग़जल बन गई...!
आंखों में आंसू, फिर भी चेहरे पर मुस्कान, अब हमारे लिए एक नई यात्रा की प्रतीक्षा है। आंखों में आंसू, फिर भी चेहरे पर मुस्कान, अब हमारे लिए एक नई यात्रा की प्रतीक...
तुम ही जाते जीत, कुछ तो बोलो मीत। तुम ही जाते जीत, कुछ तो बोलो मीत।
प्यार का नशा इतना दर्दनाक होता है हमें मालुम नहीं था। प्यार का नशा इतना दर्दनाक होता है हमें मालुम नहीं था।
विकास के नाम पर करों का अंबार चढ़ाता , वोट पाने के लिए चुनाव से पहिले खैरात बांटता. विकास के नाम पर करों का अंबार चढ़ाता , वोट पाने के लिए चुनाव से पहिले खैरात बा...
एक मुद्दत से हमने अश्कों को छुपा रक्खा था बेदर्द थी बारिश आज हमे रुला के चली गयी। एक मुद्दत से हमने अश्कों को छुपा रक्खा था बेदर्द थी बारिश आज हमे रुला के चली ...
भौतिकता की अंधी दौड़ में देखो मानव कैसे दौड़ रहा। भौतिकता की अंधी दौड़ में देखो मानव कैसे दौड़ रहा।
ज़िक्र भी तुम्हारा था फ़िक़्र भी तुम्हारी थी ज़िक्र भी तुम्हारा था फ़िक़्र भी तुम्हारी थी
ना कोई शिक़वा ना गिला है आखरी खत में प्यार से मोहब्बत को भरा है आखरी खत में। ना कोई शिक़वा ना गिला है आखरी खत में प्यार से मोहब्बत को भरा है आखरी खत में।
लेकिन चाहत है कि जब कभी, तुम डुबने लगो तब किनारा तो मैं बन पाऊँ लेकिन चाहत है कि जब कभी, तुम डुबने लगो तब किनारा तो मैं बन पाऊँ
और जब देखा उसे कराहता 'प्रेम' लहू में तर-बतर मिला। और जब देखा उसे कराहता 'प्रेम' लहू में तर-बतर मिला।
समेट लिया सूनापन भीतर विस्तृत मन. समेट लिया सूनापन भीतर विस्तृत मन.
सबल* कितने निष्ठुर* हैं उनके ठहाकों की गूंज यहाँ तक है।। सबल* कितने निष्ठुर* हैं उनके ठहाकों की गूंज यहाँ तक है।।
बहुत नजाकत से,मिट रहे है..तुम्हारे सपने,ख्वाब ?? बहुत नजाकत से,मिट रहे है..तुम्हारे सपने,ख्वाब ??
ताकि गीत गाये ये दिल जी जाऊं मैं ...... ताकि गीत गाये ये दिल जी जाऊं मैं ......
गौमाता हम सब को अपना दूध पिलाती है इसीलिए तो वह हम सबकी माता कहलाती है। गौमाता हम सब को अपना दूध पिलाती है इसीलिए तो वह हम सबकी माता कहलाती है।
अरे जिंदगी तू तो बड़ी गरीब है दरिया बीच हुई, सूखी जमीन है अरे जिंदगी तू तो बड़ी गरीब है दरिया बीच हुई, सूखी जमीन है
छोड़ दो आप तम्बाकू खाना छोड़ दो आप लोग धूम्रपान छोड़ दो आप तम्बाकू खाना छोड़ दो आप लोग धूम्रपान