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Ashu Kapoor

Abstract

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Ashu Kapoor

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ना जाने कहां-- ना जाने किधर❤❤

ना जाने कहां-- ना जाने किधर❤❤

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 वक़्त की आँधी चली, 

दिल की शाखों से

टूटे उम्मीदों के पत्ते---ऐसे---

पेड़ से टूटे पत्ते जैसे

 फिरते हैं, आवारा

 यूं ही गली-गली,

कि,मंजिल से भटके हुओं 

को,कोई नाखुदा 

ना मिला हो जैसे----


बस यूंही इस तरह

 कभी-कभी भटकता 

हुआ दिल मेरा,

टूटे हुए पत्तों की मानिंद,

 बन कर आवारा----

फिरता है---गली-गली

चल पड़ता है----


उस राहगुज़र पर---

 किस फिराक में,

 यूंही----दम ब दम

भटकता रहता है----

जा पहुंचता है कहीं का कहीं----

ना कोई राह,ना कोई मंजिल----

 भटकता ही रहता है,


उड़ता ही रहता है-----

 साथ लिये---- टूटे ख्वाब, 

टूटी उम्मीदें-----

ना जाने कहां

ना जाने किधर,

ना जाने क्यों ?


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