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parul sharma

Tragedy

3  

parul sharma

Tragedy

ना आना इस देश लाडो

ना आना इस देश लाडो

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वो नाजुक से पुष्प की ही तरह एक पौधे का सौंदर्य बढ़ाने आई थी ,

उसकी खुशबू से वातावरण की आबोहवा में खुशहाली छाई थी ,

हम सबकी तरह वो भी इस धरती पे जीवन जीने आई थी 

वो भी अपने ख्वाबों को पंख लगा कर हवा में उड़ने आई थी ,


लेकिन फिर वो काली रात आई थी ,

जब उसके जिस्म को निचोड़ कर हैवानों ने लहू की धारा बहाई थी ,

देख नजारा हैवानियत का धरा ,अम्बर और वृक्ष सभी ने अश्रुधारा बहाई थी,  

जीवन से संघर्ष कर वो अभी भी अपनी साँसे ले रही थी ,

थी उम्मीद उसको की शायद मिल जाएगा न्याय ,

आखरी सांस तक वो लड़ रही थी ,


लेकिन राजनीति के दलदल में कानून व्यवस्था भी दम तोड़ चुकी थी ,

एक मृत और निर्मम समाज से वो बेटी भी नाजायज उम्मीद कर रही थी |

 



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