माँ
माँ
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कड़ी धूप में छाँव बनकर तुम आ जाती हो
आंसू गिरते मेरे हैं लेकिन
दर्द से तुम पागल हो जाती हो
मेरी खुशियों के लिए तुम
दुनिया से लड़ जाती हो
जब हिम्मत हार जाती हूँ मैं
तुम हौसला बनकर आ जाती हो
ढाल सी बनकर तुम हर बुराई से
मुझे बचाती हो
तुम्हारी छाया में मैं जीवन भर रहना चाहती हूँ।
नहीं बाँध सकते शब्दों की सीमा में तुमको
ममता का अनंत सागर बन
तुम बस बहती जाती हो।
