STORYMIRROR

Dheerendra Verma

Inspirational

2  

Dheerendra Verma

Inspirational

मुक्तक

मुक्तक

1 min
381

शब्द से शब्द मिलते ही गान बन गया

इन धड़कते दिलों की पहचान बन गया

मैं खो ही गया था इस जहां की भीड़ में

कि अब सब दिलों की अजान बन गया


वक्त के क्रूर पल का कुछ भी भरोसा नहीं

कि खुल के जी लो जीवन का भरोसा नहीं

समय भर देता है बड़े से बड़े 'ज़ख्म' को 

फिर इंसान को वक्त पर क्यों भरोसा नहीं

          


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational