मुझे माफ़ न करना
मुझे माफ़ न करना
तेरा ग़म सालता है मुझे, जो मैंने दिया है तुझे।
मिली है सज़ा तुझे जो बिन बात के,
खत्म कैसे करूँ तेरे उस अहसास को
तू मुझे बदगुमा कर दे, मुझे बददुआ दे दे
पर तेरी खामोशी किसी शाप से कम नही लगती।
जो मन में हो तेरे, सब लिख बयां कर दे,
मुझे बस उस अपराध से मुक्त कर दे।
सोचा न था कभी ग़म दूंगी,
वक़्त पहले सा होता तेरी मरहम बनती।
दे दिया है ज़ख्म जो कभी न भूल पाओगे,
हां शायद इतना प्रेम किसी से न कर पाओगे।
अपने हर ग़म में मुझे याद करना, निशानी हूँ तेरे हर गम की,
आये जो कभी हिचकी तो बस बददुआ ही देना।
खुद से ही खत्म कर दिया है रिश्ता अपना,
कुछ और न चाहिए, तुम बस अपना ख़्याल रखना।
