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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Inspirational

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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Inspirational

मुआवजे की जिंदगी

मुआवजे की जिंदगी

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सुनो हमसफर साथियों,

देखो अच्छा है बुरा है,

यह जमाना हमारा है,

हम जमाने से साथियों।

कुछ ही लोग बुरे हैं,

बहुतायत अच्छे हैं।

मानवता पहले बनी,

समाज बाद में फैला है।

मानवता जीवित जिसपर है,

हमारी आवाज उसी पर है।

जन्म मरण एक सा,

मानव धर्म अनेक सा।

समाज में फिर क्यों बुरे बनो,

अट्ठन्नी की बात पर लड़ो,

तो कफन में जेब सिलो,

बुराई साथ जाती है,

अच्छाई रह जाती है।

मुआवजे की जिंदगी,

आदमी बदकिस्मती।



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