मत
मत
कोई आपके लिये तर-तर आंसू बहाये
उसे रुलाओ मत
कोई आपको हाथों से खाना खिलाये
उसे गिराओ मत
नसीब वाले होते है जिनका चाहनेवाला होता है,
कोई आपको अपने दिल में बसाए,
उसे सताओ मत
कोई आपकी प्यास यारो यूँ बुझाये
जैसे कोई सावन के मधुर गीत गाये
उसे रूसाओ मत
कोई आपके लबों पर मुसकुराहट लाये
उसका लहूं बहाओ मत
हर किसी की अपनी आरजू होती है
किसी को फूल की चाहत होती है
किसी को शूलों की चाहत होती है
होता वह जो नसीब की बात होती है
नसीब आइने की तरह बेहद नाजुक है
आईने से यूँ टकराओ मत
वक्त सबसे बड़ा सिकंदर है
वक्त को यूँ खोओ मत
देश मे अमन-चैन बरक़रार रखना है
नफ़रतों को यूँ फैलाओ मत
सब जगह भाईचारा फैलाओ
हिंदुस्तान को गुलिस्तां बनाओ
नफ़रतों की बयार में,
यूँ बह जाओ मत
अपना हित चाहनेवाले बहुत कम है,
हितेषी को विदेशी बनाओ मत
अपना क़रीबी गुलाब की खुश्बू है
उस फूल की खुश्बू को भरी महफ़िल में
यूँ बेवज़ह सताओ मत।
