Aarti Ayachit
Inspirational
आदि मानव से नवचेतना के हाथ
नित नये आविष्कारों के साथ,
देश हमारा चल पड़ा है
खोज में नये अनुसंधान की,
महिलाएं भी पुरुषों के साथ
हाथ में लेकर मशाल जीत की,
पहुँच रहीं हैं अंतरिक्ष में
भर रही उड़ान हैं।
भारत देश महान है...।
शीर्षक-"सुनहर...
तुम बिन
मन एक सागर
"रांगोली"(मुक...
कल
"शब्द मोतियों...
"मेला"
कहीं शुरू कही...
नज़र (छोटी कव...
"सूरज" हिंदी ...
वस्त्र शरीर का आवरण, व्यवहार है मन की पूंजी, वस्त्र शरीर का आवरण, व्यवहार है मन की पूंजी,
मुझे आता है बस अभिनय करना रिश्तों के चरित्र में ढलकर… बँट जाना घर के कमरों की तरह जिस कमरे में जाओ उ... मुझे आता है बस अभिनय करना रिश्तों के चरित्र में ढलकर… बँट जाना घर के कमरों की तर...
एक अजीब सी पागल है एक अजीब सी पागल है
चाह नहीं मैं किसी महल की , कोई चोटी या कंगूरा हूँ. चाह नहीं मैं किसी महल की , कोई चोटी या कंगूरा हूँ.
भोर - सी आस...। भोर - सी आस...।
हॉं हॉं डर मत, मार छलॉंग, जरा जोर से रख अपनी मॉंग। हॉं हॉं डर मत, मार छलॉंग, जरा जोर से रख अपनी मॉंग।
ज़रा से प्यार को भी बहुत समझो और सामने वाले से मिली उपेक्षा को भी मत सहो ज़रा से प्यार को भी बहुत समझो और सामने वाले से मिली उपेक्षा को भी मत सहो
मैं हूँ कवि , हैं काव्यमय मन-प्राण मेरे । तुम मुझे कोई नई सरगम सुना दो। मैं हूँ कवि , हैं काव्यमय मन-प्राण मेरे । तुम मुझे कोई नई सरगम सुना दो।
सच्चा ज्ञान ही इस दुनिया में असली पावर होता है। सच्चा ज्ञान ही इस दुनिया में असली पावर होता है।
नवलेखकों का अंग्रेजी के तरफ बढ़ता प्रेम मान्य है परंतु हिंदी से प्रेम ना कर पाना उचित नहीं । - विद्रो... नवलेखकों का अंग्रेजी के तरफ बढ़ता प्रेम मान्य है परंतु हिंदी से प्रेम ना कर पाना ...
कर सकूँ कुछ ऐसा...। कर सकूँ कुछ ऐसा...।
माँ बाप के बिगड़े बच्चे, संस्कारों को भूलते बच्चे, क्या लड़का, क्या लड़कियां, क्या नौजवान माँ बाप के बिगड़े बच्चे, संस्कारों को भूलते बच्चे, क्या लड़का, क्या लड़कियां, क...
भावों को शब्दों में भरकरपन्नों पर बिखराते हैं जोबंजर मन में नेह-सुमन कीनूतन पौध लगाते हैं जो भावों को शब्दों में भरकरपन्नों पर बिखराते हैं जोबंजर मन में नेह-सुमन कीनूतन पौध ...
गलत शब्द प्रयोग करें तो होती है बड़ी निराशा। गलत शब्द प्रयोग करें तो होती है बड़ी निराशा।
क्या करता हूँ मैं अपने अंदर के खालीपन के साथ ? जानने के लिए पढ़िए यह कविता...। क्या करता हूँ मैं अपने अंदर के खालीपन के साथ ? जानने के लिए पढ़िए यह कविता...।
मेरे मुल्क़ में फिर से पैदा हों गाँधी, भगत, और आज़ाद। इंकलाब जिंदाबाद ! मेरे मुल्क़ में फिर से पैदा हों गाँधी, भगत, और आज़ाद। इंकलाब जिंदाबाद !
आंसू मोती से अनमोल , विक्षिप्त होकर न व्यर्थ बहाओ। आंसू मोती से अनमोल , विक्षिप्त होकर न व्यर्थ बहाओ।
जीवन...। जीवन...।
भारत के वीर सपूत,देश हित जान गंवाई अपनी जान दी कभी गर्दन नहीं झुकाई। भारत के वीर सपूत,देश हित जान गंवाई अपनी जान दी कभी गर्दन नहीं झुकाई।
चलते चलते ज़िन्दगी के सफर में, शायद सच्चा हमराही मिल जाए। चलते चलते ज़िन्दगी के सफर में, शायद सच्चा हमराही मिल जाए।