STORYMIRROR

Syeda Noorjahan

Abstract

4  

Syeda Noorjahan

Abstract

मोहब्बत रोग होती है

मोहब्बत रोग होती है

1 min
205

सोच से परे निकला

मोहब्बत का सफ़र जानम

रुह को छलनी करके 

हमने है जाना जानम

मोहब्बत रोग होती है

लगातार सोग होती है

गुज़रे ज़मानों के लोग बताते थे

बहुत कहानियां सुनाते थे

हमें आगाह करते थे

मगर हम मानते कब थे

यह सब कुछ जानते कब थे

मोहब्बत के नशे में चूर थे हम

हमें मालूम ही कब था

कि मोहब्बत रोग होती है

लगातार सोग होती है

तुम्हारी यादों के समंदर में

मोहब्बत तुफ़ान उठाती है

दिन भर चैन नहीं देती

रात भर रुलाती है

मैं जब कुछ लिखने की कोशिश करुं

मेरे हाथों में पड़ा क़लम

बस तेरा नाम ही लिखता है

और लिखता ही चला जाता है

मेरा हर शब्द कहता है

कि तेरे बिन ज़िन्दगी का

कोई लम्हा नहीं कटता

तुम हर पल और मुझमें बसते हो

मेरा मुझ में कुछ नहीं बचता

मैं जब कुछ गुनगुनाया करुं

मेरे अंदर बसी हुई तेरी आवाज़

मेरे लबों को छू जाती है

मगर हकीकत में तुम

मुझसे दूर बहुत दूर हो जानम

और अब दुनिया से हम कहते हैं

मोहब्बत रोग होती है

लगातार सोग होती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract