Rajat Patel
Thriller
इस सारी को इज्जत को दफन किए जाए,
आज इश्क़ के नाम पे थोड़े ज़ख्म दिए जाए,
आज कल तो मोहब्बत का यही नाम है,
चलो हो गई मोहब्बत अब कपड़े पहन लिए जाए।
मोहब्बत और जि...
तुझे बना कर औ...
कैसे प्रेम प्...
हमारी वजह से ...
एक ही ख्वाहिश
ख्वाबों में त...
इश्क़ और मौत
इश्क़ का खेल
जो खयाल कभी आया नहीं क्या यह वह हकीकत है जो खयाल कभी आया नहीं क्या यह वह हकीकत है
पार नहीं पाया कभी, आंखों में भरे जब राज, शहीदों की आंखों पर, देश को होता है नाज।। पार नहीं पाया कभी, आंखों में भरे जब राज, शहीदों की आंखों पर, देश को होता है न...
पर प्रकृति की क्रोध के आगे मनुष्य बड़ा लाचार है। पर प्रकृति की क्रोध के आगे मनुष्य बड़ा लाचार है।
मौसम का बदलना दस्तूर है, शायद दिल को भी ये कबूल है।। मौसम का बदलना दस्तूर है, शायद दिल को भी ये कबूल है।।
इस निविड़ बने जीवन में फिर से आनंद की इक लहर बह जाने दे। इस निविड़ बने जीवन में फिर से आनंद की इक लहर बह जाने दे।
आओ तुमको वीर शहीदों की गाथा बतलाता हूं अरे आजादी के दीवानों की कुर्बानी दोहराता हूं आओ तुमको वीर शहीदों की गाथा बतलाता हूं अरे आजादी के दीवानों की कुर्बानी दोहरा...
यूँ इस दुनिया से जाने के बाद भी हमारी कहानी को … उस के शब्दों को आबाद करेंगे यूँ इस दुनिया से जाने के बाद भी हमारी कहानी को … उस के शब्दों को आबाद करेंगे
जिसे मैंने जाना …… यशवी और उसने समझाया है …. जिसे मैंने जाना …… यशवी और उसने समझाया है ….
अधर्म राह का करके पालन और असत्य का उच्चारण , धर्मराज से धर्म लुप्त था और कृष्ण से सत्य अधर्म राह का करके पालन और असत्य का उच्चारण , धर्मराज से धर्म लुप्त था और कृष्...
हम उनका सोचा करते थे , दिल से निभाया करते थे l हम उनका सोचा करते थे , दिल से निभाया करते थे l
आकाश के तारे गिनना चांद की सुंदरता को निहारना आकाश के तारे गिनना चांद की सुंदरता को निहारना
हमारी ज़रूरत के लिए, हम अच्छे कमरे आसपास में ढूँढ़ने लगे। हमारी ज़रूरत के लिए, हम अच्छे कमरे आसपास में ढूँढ़ने लगे।
स्वच्छ हो भारत, स्वस्थ रहें सब - ये सन्देश जन-जन तक पहुँचाना है, स्वच्छ हो भारत, स्वस्थ रहें सब - ये सन्देश जन-जन तक पहुँचाना है,
हां, मैं महिला हूं शायद इसीलिये ये सब कर पाती हूं। हां, मैं महिला हूं शायद इसीलिये ये सब कर पाती हूं।
मेरी बच्ची तुम यह न सोचना कि मैं तुम्हारे अरमानों को दबाना चाहती हूं, मैं तो बस कुछ भेड़ियों क... मेरी बच्ची तुम यह न सोचना कि मैं तुम्हारे अरमानों को दबाना चाहती हूं, मैं ...
व्यथा व्यथा
क्या मेरी तरह वह भी तेरे ना कमाने पर खुद से घर खर्च उठाता है? क्या मेरी तरह वह भी तेरे ना कमाने पर खुद से घर खर्च उठाता है?
धूप की चादर ओढ़े, काँपते साये में जन्मा था वह बदनसीब, माँ की गोद में, दूध की बूंदें नहीं था, धूप की चादर ओढ़े, काँपते साये में जन्मा था वह बदनसीब, माँ की गोद में, दूध की बू...
मैं किसी अलग पहचान की मोहताज नहींं मैं खुद एक पहचान हूं। मैं किसी अलग पहचान की मोहताज नहींं मैं खुद एक पहचान हूं।
पर धर्म के अंधों को कैसे ओ नियति मैं समझाऊँगा पर धर्म के अंधों को कैसे ओ नियति मैं समझाऊँगा