Rajat Patel
Thriller
इस सारी को इज्जत को दफन किए जाए,
आज इश्क़ के नाम पे थोड़े ज़ख्म दिए जाए,
आज कल तो मोहब्बत का यही नाम है,
चलो हो गई मोहब्बत अब कपड़े पहन लिए जाए।
मोहब्बत और जि...
तुझे बना कर औ...
कैसे प्रेम प्...
हमारी वजह से ...
एक ही ख्वाहिश
ख्वाबों में त...
इश्क़ और मौत
इश्क़ का खेल
मगर कौन जाने ख्वाबों को मूंद कहीं एक सूर्य अस्त भी हुआ। मगर कौन जाने ख्वाबों को मूंद कहीं एक सूर्य अस्त भी हुआ।
हे लाल लंगूर, आज शरण तुम्हारी हम आए भर लो विपदा हमारी हे लाल लंगूर, आज शरण तुम्हारी हम आए भर लो विपदा हमारी
मौसम का बदलना दस्तूर है, शायद दिल को भी ये कबूल है।। मौसम का बदलना दस्तूर है, शायद दिल को भी ये कबूल है।।
मेरी अपनी सल्तनत मेरा अपना राज अकेली मैं सम्राज्ञी, पूरी करूँ मन की प्यास, मेरी अपनी सल्तनत मेरा अपना राज अकेली मैं सम्राज्ञी, पूरी करूँ मन की प्यास,
लेकिन अपनी छाप यहां छोड़ना हैं, यादों में जीना, खुद को अमर करना हैं। लेकिन अपनी छाप यहां छोड़ना हैं, यादों में जीना, खुद को अमर करना हैं।
जिसे मैंने जाना …… यशवी और उसने समझाया है …. जिसे मैंने जाना …… यशवी और उसने समझाया है ….
इस जोश -ए वतन में कुछ कह रही साँसें मेरी इस जोश -ए वतन में कुछ कह रही साँसें मेरी
जो अपनों को कुचलकर जश्न मनाते हैं सच में ज़िंदा लाशों के सिवा कुछ भी तो नहीं जो अपनों को कुचलकर जश्न मनाते हैं सच में ज़िंदा लाशों के सिवा कुछ भी तो नहीं
क्या अभी कुछ हो सकता है ...कोई चमत्कार! क्या लौट के आ सकते हैं उस युवा के प्राण क्या अभी कुछ हो सकता है ...कोई चमत्कार! क्या लौट के आ सकते हैं उस युवा के प्र...
आकाश के तारे गिनना चांद की सुंदरता को निहारना आकाश के तारे गिनना चांद की सुंदरता को निहारना
अपने आसपास एक जादू बना के रखते हैं। हर दिशा में इनके मुंह, कान और आंख होते हैं। अपने आसपास एक जादू बना के रखते हैं। हर दिशा में इनके मुंह, कान और आंख होते है...
माँग रही है सदा सदा को साथ अपने पिया का, तुम बस दोनों को लम्बी उम्र की राह चुनते जाना। माँग रही है सदा सदा को साथ अपने पिया का, तुम बस दोनों को लम्बी उम्र की राह चु...
उलझनों की माला उतारके फेंक दो गले से मायावी जाल में कब तक यूँ अटकते रहोगे। उलझनों की माला उतारके फेंक दो गले से मायावी जाल में कब तक यूँ अटकते रहोगे।
साँसों की दहलीज़ पर बैठे मैं मौत का इंतेज़ार हो गया हूँ। साँसों की दहलीज़ पर बैठे मैं मौत का इंतेज़ार हो गया हूँ।
प्रेम के रंगों में मिलते देखा है। दो प्रेमियों को मिलते देखा है। प्रेम के रंगों में मिलते देखा है। दो प्रेमियों को मिलते देखा है।
खुद को करके उसके हवाले चैन से सो रही थी आषाढ़ का महीना रिमझिम बरसात हो रही थी खुद को करके उसके हवाले चैन से सो रही थी आषाढ़ का महीना रिमझिम बरसात हो रही थी
जो शब्द से परे हो एक हाथ जो हाथ नहीं उसके होने का आभास हो जो शब्द से परे हो एक हाथ जो हाथ नहीं उसके होने का आभास हो
बेईमान मौसम का मिजाज़ आशिकाना है इसकी शातिर चाल में तुम बहक मत जाना बेईमान मौसम का मिजाज़ आशिकाना है इसकी शातिर चाल में तुम बहक मत जाना
भारत की जय भारत की जय कंठ कंठ से गूँज उठने लगे। भारत की जय भारत की जय कंठ कंठ से गूँज उठने लगे।
अपने कर्मों से बनती जग, पुरुषत्व की यही परिभाषा।। अपने कर्मों से बनती जग, पुरुषत्व की यही परिभाषा।।