Rajat Patel
Thriller
इस सारी को इज्जत को दफन किए जाए,
आज इश्क़ के नाम पे थोड़े ज़ख्म दिए जाए,
आज कल तो मोहब्बत का यही नाम है,
चलो हो गई मोहब्बत अब कपड़े पहन लिए जाए।
मोहब्बत और जि...
तुझे बना कर औ...
कैसे प्रेम प्...
हमारी वजह से ...
एक ही ख्वाहिश
ख्वाबों में त...
इश्क़ और मौत
इश्क़ का खेल
कहीं देवदार के पेड़, कहीं चीड़ सामने खड़े हैं यहाँ के मौसम के भी, सूना है मिज़ाज बड़े हैं कहीं देवदार के पेड़, कहीं चीड़ सामने खड़े हैं यहाँ के मौसम के भी, सूना है मिज़ाज...
पर प्रकृति की क्रोध के आगे मनुष्य बड़ा लाचार है। पर प्रकृति की क्रोध के आगे मनुष्य बड़ा लाचार है।
मौसम का बदलना दस्तूर है, शायद दिल को भी ये कबूल है।। मौसम का बदलना दस्तूर है, शायद दिल को भी ये कबूल है।।
इस निविड़ बने जीवन में फिर से आनंद की इक लहर बह जाने दे। इस निविड़ बने जीवन में फिर से आनंद की इक लहर बह जाने दे।
श्वेत है अम्बर, श्वेत है धरा, शिशिर का प्रकृति कृति से आत्मसात। श्वेत है अम्बर, श्वेत है धरा, शिशिर का प्रकृति कृति से आत्मसात।
जिसे मैंने जाना …… यशवी और उसने समझाया है …. जिसे मैंने जाना …… यशवी और उसने समझाया है ….
अधर्म राह का करके पालन और असत्य का उच्चारण , धर्मराज से धर्म लुप्त था और कृष्ण से सत्य अधर्म राह का करके पालन और असत्य का उच्चारण , धर्मराज से धर्म लुप्त था और कृष्...
बस मेरा दर्द पहचानो.. दिल रोता तुमसे दूर रहकर, अन्दर ही अन्दर मचलकर..! बस मेरा दर्द पहचानो.. दिल रोता तुमसे दूर रहकर, अन्दर ही अन्दर मचलकर..!
हां, मैं महिला हूं शायद इसीलिये ये सब कर पाती हूं। हां, मैं महिला हूं शायद इसीलिये ये सब कर पाती हूं।
लबादा फैला कर, आराम से बैठ कर गंदी-मटमैली गठरी खोल कर चाँद की मोटी, रोटी निकाली थी लबादा फैला कर, आराम से बैठ कर गंदी-मटमैली गठरी खोल कर चाँद की मोटी, रोटी...
मैं लिखना चाहता हूँ गहरे जख्मों की कहानियां। मैं लिखना चाहता हूँ गहरे जख्मों की कहानियां।
महज सांसों का रुक जाना, नहीं होता है बुराई का अंत, महज सांसों का रुक जाना, नहीं होता है बुराई का अंत,
भूखी मरती चली गई, क्या हसीन चेहरा, लगता थी कि देवता भी, देते आये पहरा।। भूखी मरती चली गई, क्या हसीन चेहरा, लगता थी कि देवता भी, देते आये पहरा।।
धूप की चादर ओढ़े, काँपते साये में जन्मा था वह बदनसीब, माँ की गोद में, दूध की बूंदें नहीं था, धूप की चादर ओढ़े, काँपते साये में जन्मा था वह बदनसीब, माँ की गोद में, दूध की बू...
मैं तुमको अपना बनाने आ रहा हूँ हमेशा हमेशा के लिए बस तुम मेरा इंतज़ार करना। मैं तुमको अपना बनाने आ रहा हूँ हमेशा हमेशा के लिए बस तुम मेरा इंतज़ार करन...
तू लड़की नहीं चंचला है। तुझे देख कर मेरा दिल तुझ पर डोला है। तू लड़की नहीं चंचला है। तुझे देख कर मेरा दिल तुझ पर डोला है।
अभी नादान है दिल कुछ समझता नहीं है इश्क की छांव में थोड़ा बड़ा तो होने दीजिए। अभी नादान है दिल कुछ समझता नहीं है इश्क की छांव में थोड़ा बड़ा तो होने दीजिए।
कटे हुए नर मस्तक थे जो , उनको हाथ दबाया। कटे हुए नर मस्तक थे जो , उनको हाथ दबाया।
यादें हैं बचपन की चुलबुली सी शुभकामनायें आप सब को होली की ! यादें हैं बचपन की चुलबुली सी शुभकामनायें आप सब को होली की !
अपने कर्मों से बनती जग, पुरुषत्व की यही परिभाषा।। अपने कर्मों से बनती जग, पुरुषत्व की यही परिभाषा।।