Rajat Patel
Thriller
इस सारी को इज्जत को दफन किए जाए,
आज इश्क़ के नाम पे थोड़े ज़ख्म दिए जाए,
आज कल तो मोहब्बत का यही नाम है,
चलो हो गई मोहब्बत अब कपड़े पहन लिए जाए।
मोहब्बत और जि...
तुझे बना कर औ...
कैसे प्रेम प्...
हमारी वजह से ...
एक ही ख्वाहिश
ख्वाबों में त...
इश्क़ और मौत
इश्क़ का खेल
कबतक तू चेतेगा मानव, अब मौत खड़ी दे दस्तक द्वार! कबतक तू चेतेगा मानव, अब मौत खड़ी दे दस्तक द्वार!
तभी हो सकेगा उस पर एक समेकित प्रहार। तभी हो सकेगा सुरसा-संघार ! तभी हो सकेगा उस पर एक समेकित प्रहार। तभी हो सकेगा सुरसा-संघार !
वो हिस्सा मेरे धड़कन का वो किस्सा मेरे फ़साने का वो कामिल सिरमौर का....! वो हिस्सा मेरे धड़कन का वो किस्सा मेरे फ़साने का वो कामिल सिरमौर का....!
काजल लगाने से तस्वीर में भी जान आ जाती है। काजल लगाने से तस्वीर में भी जान आ जाती है।
क्या होगा तेरा इस बार जवाब, जब होगा महाकाल का रौद्र हिसाब। क्या होगा तेरा इस बार जवाब, जब होगा महाकाल का रौद्र हिसाब।
ख़त्म करने का वो आदाब भी आता ही नहीं। ख़त्म करने का वो आदाब भी आता ही नहीं।
नरभक्षों की चढ़े बलि, मिले न्याय यह सबने ठानी है। नरभक्षों की चढ़े बलि, मिले न्याय यह सबने ठानी है।
ना किसी से शिकायत थी। वो मेरा बचपन था जो अब लौट ना आयेगा। ना किसी से शिकायत थी। वो मेरा बचपन था जो अब लौट ना आयेगा।
जब युद्ध होगा समाप्त जब युद्ध होगा समाप्त
भविष्य देना चाहते हैं ये वादी में लड़ने वाले क्या जन्नत में खून की नदियां बहती हैं..... भविष्य देना चाहते हैं ये वादी में लड़ने वाले क्या जन्नत में खून की नदियां बहती...
आकाश गंगाओं का मर जाना, ग्रहों का बनके टूट जाना इंसानो, जानवरों, पेड़ो, पहाड़ो, समुद्रों आकाश गंगाओं का मर जाना, ग्रहों का बनके टूट जाना इंसानो, जानवरों, पेड़ो, पहाड़ो,...
जब झूमी पेड़ों के डाली बसन्त में देखी हरियाली। जब झूमी पेड़ों के डाली बसन्त में देखी हरियाली।
जल रही ज़िंदा चिता पर जिस्म पर तेज़ाब लिये हाल पर उसकी सितम भी एक कहानी गढ़ रही है! जल रही ज़िंदा चिता पर जिस्म पर तेज़ाब लिये हाल पर उसकी सितम भी एक कहानी गढ़ रही ह...
कल का नहीं भरोसा कोई फिर भी सरहद पर डटा हुआ है कल का नहीं भरोसा कोई फिर भी सरहद पर डटा हुआ है
प्यार की बुंदे बरसाती रहती हैं प्यार की बुंदे बरसाती रहती हैं
यह झाँसी लोगों की है और यह मणि झाँसी की है। यह झाँसी लोगों की है और यह मणि झाँसी की है।
और चल पड़ी अपने शिकार को लिखने फिर एक नया खौफनाक मंजर। और चल पड़ी अपने शिकार को लिखने फिर एक नया खौफनाक मंजर।
अभी तक कितनों ने लोक लाज को छोड़ा है बेशर्मी का चोला ओढ़ा है अभी तक कितनों ने लोक लाज को छोड़ा है बेशर्मी का चोला ओढ़ा है
रास्ता खुद ही चुने ऐसा सफलता को छू ले जैसा रास्ता खुद ही चुने ऐसा सफलता को छू ले जैसा
बहुत रंग रंगे लग रहे हैं, शायद वसंत आया है। बहुत रंग रंगे लग रहे हैं, शायद वसंत आया है।