STORYMIRROR

Sunita Arora

Abstract

3  

Sunita Arora

Abstract

मंजरी

मंजरी

1 min
208

एक मंजरी 

गिरी नैन-वृंदा से 

कपोल पर। 


कोपलें सभी

फूट पड़ीं भावों की

हृदय भू से। 


मेघ आवृत 

जो घेरे था मन को

किसी शून्य सा। 


बरस पड़ा 

तोड़ समस्त बाँध

 तीव्र वेग से। 


धुंध भी छंटी

इंद्रधनुष खिला

नई आस का।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract