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Sunita Arora

Others

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Sunita Arora

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जीवन सरि

जीवन सरि

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जीवन सरि-सा बहता जाए,

रुकना ना तुम, कहता जाए।


पल - पल बदले, मौसम जैसे, 

सुख दुःख छलते मन को वैसे। 

विधि का लेखा, चलता जाए, 

रुकना ना तुम, कहता जाए।। 


चातक प्यासा तकता अंबर, 

सूखी धरती, आँचल बंजर।

ऋतु का पहिया डगता जाए, 

रुकना ना तुम, कहता जाए।। 


परबत जल का, पथ हैं रोके, 

बाधा कितनी उस को टोके। 

धारा बन वो, बहता जाए, 

रुकना ना तुम, कहता जाए।। 


जीवन सरि-सा बहता जाए, 

रुकना ना तुम, कहता जाए।। 


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