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कुछ शब्द जो फूट पड़े थे कलम से वो छोड़कर गए थे एक स्याह छाप! कुछ शब्द जो फूट पड़े थे कलम से वो छोड़कर गए थे एक स्याह छाप!
दिखाती है जब रूप विकराल ये मूक सृष्टि, धैर्य खो के मनुष्य तब और अघोर होता जा रहा। दिखाती है जब रूप विकराल ये मूक सृष्टि, धैर्य खो के मनुष्य तब और अघोर होता जा...
था वजूद-ए-चश्म किसका इस जहां से पहले भी, था वजूद-ए-चश्म किसका इस जहां से पहले भी,
ख़यालों से अभी तेरा ख़याल गुजरा है। कि जैसे दश्त से कोई ग़ज़ाल गुजरा है। ख़यालों से अभी तेरा ख़याल गुजरा है। कि जैसे दश्त से कोई ग़ज़ाल गुजरा है।
कोख में पनपी हर किलकारी के साथ स्वप्न झरते हैं। कोख में पनपी हर किलकारी के साथ स्वप्न झरते हैं।
इक दिल से दूजे के दिल तक पहुँचे बन तितली ग़ज़लें। इक दिल से दूजे के दिल तक पहुँचे बन तितली ग़ज़लें।
घी में लिपटी, नान हो जातीं रईसी रोटियाँ। घी में लिपटी, नान हो जातीं रईसी रोटियाँ।
जीवन सरि-सा बहता जाए, रुकना ना तुम, कहता जाए। जीवन सरि-सा बहता जाए, रुकना ना तुम, कहता जाए।
धुंध भी छंटी इंद्रधनुष खिला नई आस का। धुंध भी छंटी इंद्रधनुष खिला नई आस का।