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Sunita Arora

Others

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Sunita Arora

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ग़ज़ल

ग़ज़ल

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सफ़हों के सागर में ही रहतीं, कितनी उथली ग़ज़लें, 

सागर को गागर में भरकर तब दिल से निकली ग़ज़लें। 


क्या तेरा, क्या मेरा, हाल सभी का था अशआरों में, 

इक दिल से दूजे के दिल तक पहुँचे बन तितली ग़ज़लें। 


होगा शायर वो भी उम्दा, पर्दे तक जो ना पहुँचा, 

घुटती होंगी खामोशी से ज्यों जल बिन मछली ग़ज़लें। 


तुम न सुखन को आँको बह्रों रदीफ़ और काफ़ियों में, 

जज़्बात अगर ना हों सच्चे तो फिर हैं नकली ग़ज़लें। 


सुख में हंसती, दुःख में रोती, जैसे कोई सहेली हो, 

जीवन की ज्वाला में तपकर हो जाती उजली ग़ज़लें। 


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