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Rajeev Kumar

Inspirational

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Rajeev Kumar

Inspirational

मंजिल; एक पड़ाव

मंजिल; एक पड़ाव

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दुनिया के ग़म सहते हुए

दिल पे कई सितम सहते हुए

वक्त की धार में बहते हुए

कर लिया मैंने हासिल

पा लिया है मैंने मंज़िल ।


मंज़िल को एक पड़ाव मानता हूँ

हर पड़ाव से जुड़ाव मानता हूँ

पता है नहीं है मुकम्मल

पाई है जो मैंने मंज़िल ।


दौर बदला हालात भी बदले

जज़्बात लूटने कई ख्यालात बदले

अपनाया न किसी को, न किया शामिल

पा लिया है मैंने मंज़िल ।


कई बार तबाह हुए तो मिली वाह

वाह ने किया हौसला आफजाह

और भटकता रहा गाफिल

और पा लिया एक मंज़िल ।



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