मन
मन
जब किसी का मन टूटता है
और कहीं मन जुड़ता है,
इसी जुड़ने और टूटने के मध्य,
कविता शब्दों का रूप लेती है !!
जब दिखे रूढ़िवादी संस्कार पर,
आधुनिकता का पारदर्शी जामा
मानवता दूर भटकती दिखे तब
कविता शब्दों का रूप लेती है !!!
जब भीड़ वृद्धाश्रमों में दिखे,
गृह सांय सांय वीरान हो,
लोग आत्मकेंद्रित हो जाये तब
कविता शब्दों का रूप लेती है !!!
जब चोट मन को लगे,
आंखों में बादल छाए हो,
और विश्वास का ह्रास हो तब
कविता शब्दों का रूप लेती है !!!
जब छोटी सी घटनाएं भी,
पक्षी की हो या मानव की,
मथने लग जाये मन को तब,
कविता शब्दों का रूप लेती है !!!
