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मधुशिल्पी Shilpi Saxena

Abstract

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मधुशिल्पी Shilpi Saxena

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मन

मन

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निर्मल जल सा मन दर्पण

स्वच्छंद पवन सा मन अर्पण


प्रीत की साधना मे तल्लीन

करूँ तेरे सम्मुख समर्पण


न हो भय न रीत कोई

न हो दिल मे टीस कोई


हम तुम हो और न होए कोई

रुहें इक दूजे में होए खोई।


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