मन का उदगार
मन का उदगार
लिखूंगा,पोस्ट भी करूंगा,चलता रहेगा ये मेरा लेखन,
पढ़े या न पढे ,पसंद करे या न करें,ये आपका मन ।।
लिखूंगा व्यंग्य भी,कविता भी,भजन और लघुकथा भी
देश में जो भी घटेगी नाना घटनाएं ,लिखूंगा वो कथा भी।
यह चित शांति का जरिया भी है,और ये मनोरंजन भी है
ये मेरी पूजा है,ये मेरा शौक है,यह दिमागी व्यंजन भी है।
इसी में मेरी खुशियां है,जीवन जीने का सही सलीका है
यही आपसे निकटता ,बनाये रखने का सही तरीका है।।
कुछ समसामयिक भी ,कुछ भविष्यवाणियां रहती है,
कुछ रचनाओं में आस पास की परेशानियां रहती है।
विद्वतापूर्ण भले न हो, पर भौंडा प्रदर्शन नही रहता
कुछ चुटीला होता है,पर कुछ में मार्गदर्शन भी रहता।
मजाकिया अंदाज रहता है, पर फूहड़पन नही रहता
नुकीले कटाक्ष रहता है किसी से जलन नही रहता।
कुछ को बुरा भी लगता,तो कुछ को अच्छा भी लगता
क्यां करूँ ,मनुष्य हूँ मैँ ,सबको खुश नही रख सकता।।
