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Pankaj Kumar Patodi

Tragedy

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Pankaj Kumar Patodi

Tragedy

मन बावरा

मन बावरा

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कभी सोचता हूँ कि क्यों हवाओं में ये ज़हर घुल रहा हैं

फिर समझ लेता हूँ की क़िसी ने छोड़ दिया अपना कर्तव्य


समझ नहीं पाता कि मैं क़ैसे निभाऊँ अपना धर्म

क्या छोड़ जायेंगे हम अपनी विरासत में।


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