मेरी सपनों की दुनिया
मेरी सपनों की दुनिया
हां मेरी भी एक सपनों की दुनिया है,
आंखें बंद करते ही मैं सैर पर निकल जाती हूं उस सपनों की दुनिया पर,
दिल की बंद लिफाफे पर कुछ सवाल है,
उन सवालों के जवाब ही मैं सपनों में ढूंढती हूं
कुछ रंग-बिरंगे, कुछ अजीबोगरीब, कुछ अटपटे से,
और शायद कुछ डरावने भी,
खोलती हूं रोज एक लिफाफा दिल के एक सवाल का,
फिर वही सवाल बन जाते हैं ख्वाब मेरे,
और जवाब भी मिल जाते हैं ख्वाब में ही मेरे,
हां कभी-कभी डर लगता है कुछ लिफाफे खोलने में,
ना जाने क्या जवाब मिल जाए,
फिर भी जाना तो पड़ता है उस सपनों की दुनिया पर,
शायद कुछ हसीन ख्वाब उम्र भर का साथ बन जाए,
हां तकल्लुफ रोज नहीं देती हूं मैं इन आंखों को,
कभी-कभी कुछ ख्वाब देखे बिना ही उठ जाया करती हूं।
