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Komal Kamble

Inspirational


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Komal Kamble

Inspirational


मेरी मिट्टी

मेरी मिट्टी

1 min 208 1 min 208

मिट्टी के लिए लहू बहाकर

मिट्टी पर कुर्बान हुआ हूं

आखिरी सांस तक लड़कर

मैं अपनों के लिए कुर्बान हुआ हूं।


वतन के लिए फर्ज मेरा

मैं पूूूरा न कर सका

रह गया वो वादा अधूरा

जो मिट्टी के लिए निभा न सका।


मेरे लहू मेेे अश्कों में

सिर्फ इतना दर्द गूंज रहा

ए खुदा मेरे मुझे तू वतन के लिए

और सांसें क्यों न दे सका।


वतन के लिए मेरी

मैं अपनी सौ जाने लूंटा दूं

हर जन्म में आखरी सांस तक

मिट्टी का मेरी मैं पहरेदार रहूं।


ए मेरे वतन तू

ऐसे ही आबाद रहे

मैं रहूं या ना रहूं

तू ऐसे ही आजाद रहे।


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