STORYMIRROR

अच्युतं केशवं

Abstract

2  

अच्युतं केशवं

Abstract

मेरी जिन्दगी की कलम में

मेरी जिन्दगी की कलम में

1 min
121

मेरी जिन्दगी की

कलम में

स्याही थी,


जिससे हृदय के

शोक श्वेत

कागज पर

उकेरता था,


स्याह आखर

समय बदला

और तुम आयी,


तुम्हारी धवल

आत्मा के प्रकाश में

रोशन हो उठा

मेरा ह्रदय,


मेरा आखर

आखर

अब

मेरी कलम में

स्याही नहीं

रौशनाई है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract