अच्युतं केशवं
Abstract
मेरी जिन्दगी की
कलम में
स्याही थी,
जिससे हृदय के
शोक श्वेत
कागज पर
उकेरता था,
स्याह आखर
समय बदला
और तुम आयी,
तुम्हारी धवल
आत्मा के प्रकाश में
रोशन हो उठा
मेरा ह्रदय,
मेरा आखर
आखर
अब
मेरी कलम में
स्याही नहीं
रौशनाई है।
मन आस तारा
सहज तुमने अपन...
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वीर प्रहरियों की शहादत का शहीद दिवस मनाए, पुलवामा के हमले का काला दिवस मनाए ! वीर प्रहरियों की शहादत का शहीद दिवस मनाए, पुलवामा के हमले का काला दिवस मनाए !
सत्य सनातन धर्म यही, दुख दोष सभी जग के हर लें सत्य सनातन धर्म यही, दुख दोष सभी जग के हर लें
प्रकृति आत्मानुभूति मैं अविनाशी अपार हूँ मैं प्यार हूँ। प्रकृति आत्मानुभूति मैं अविनाशी अपार हूँ मैं प्यार हूँ।
पढ़ लिख कर आगे बढ़ जाएंगे, इस दुनिया को पीछे छोड़ जाएंगे। पढ़ लिख कर आगे बढ़ जाएंगे, इस दुनिया को पीछे छोड़ जाएंगे।
आसान कब है जिंदगानी हर मोड़ पर भेडिया खड़ा है। आसान कब है जिंदगानी हर मोड़ पर भेडिया खड़ा है।
चाँद से हमारा, रिश्ता है सदियों पुराना ! चाँद से हमारा, रिश्ता है सदियों पुराना !
ये यादों की माला, जो जीने का सहारा, जिन्दगी की धारा, यादें याद आती है। ये यादों की माला, जो जीने का सहारा, जिन्दगी की धारा, यादें याद आती है।
कर्ज रूपी पहाड़ तले, दबने से तुमने बचा दिया कर्ज रूपी पहाड़ तले, दबने से तुमने बचा दिया
इशारे में भी न छलना तू किनारे ही चलना। इशारे में भी न छलना तू किनारे ही चलना।
क्यों हम चंद रुपयों के लिए अपनों को ही गैर बनाते हैं। क्यों हम चंद रुपयों के लिए अपनों को ही गैर बनाते हैं।
मैं हूं तेरी कठपुतली नाचूं तेरे हाथ में। मैं हूं तेरी कठपुतली नाचूं तेरे हाथ में।
प्रकृति बिन न होगा कल है प्रकृति से हमारा जीवन जल है। प्रकृति बिन न होगा कल है प्रकृति से हमारा जीवन जल है।
हफ्ते भर का जोश जगा बाद उसके बुझ गयी मशालें चार भाषण बोलकर ! हफ्ते भर का जोश जगा बाद उसके बुझ गयी मशालें चार भाषण बोलकर !
मनाकर अपनों को प्यार से, जोड़ना ये डोर सपनों से। मनाकर अपनों को प्यार से, जोड़ना ये डोर सपनों से।
'जिंदगी 'मर रही रूह इंसानियत की जिस्म में अब क्या सिर्फ इंसान जिंदे हैं। 'जिंदगी 'मर रही रूह इंसानियत की जिस्म में अब क्या सिर्फ इंसान जिंदे हैं।
वो रिश्ता भी कोहरे की चादर में महफूज रखा है कोहरे की खुशबू में अब उसकी खुशबू है! वो रिश्ता भी कोहरे की चादर में महफूज रखा है कोहरे की खुशबू में अब उसकी खुशबू ...
लेखक रहे या न रहे कल पर शब्द उसके हमेशा रहेंगे अमर। लेखक रहे या न रहे कल पर शब्द उसके हमेशा रहेंगे अमर।
पर तू मेरी दुनिया नहीं मेरा सबकुछ हैं बस ये याद रख लेना। पर तू मेरी दुनिया नहीं मेरा सबकुछ हैं बस ये याद रख लेना।
लगता है पशोपेश में है किरदार हमारा कोई किरदार यूं ही अंजान नहीं बनता। लगता है पशोपेश में है किरदार हमारा कोई किरदार यूं ही अंजान नहीं बनता।
तान- प्रेम की छेड़ - धीरे से मुझको बुलाता राधा संग रास रचा खिड़की से गाता चांद तान- प्रेम की छेड़ - धीरे से मुझको बुलाता राधा संग रास रचा खिड़की से गाता चां...