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Sagar Joshi

Romance

4.5  

Sagar Joshi

Romance

मेरी बंजर ज़िंदगी में खिलता हुआ इकलौता गुलाब हो

मेरी बंजर ज़िंदगी में खिलता हुआ इकलौता गुलाब हो

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मेरी बंजर ज़िंदगी में खिलता हुआ इकलौता गुलाब हो तुम,
सूखे मौसम में आई पहली बारिश का ख़्वाब हो तुम।
जब चारों तरफ़ उदासियों का अंधेरा छा जाता है,
मेरे दिल को रोशन करने वाला आफ़ताब हो तुम।

तुम्हारी मुस्कान से महक उठती है मेरी हर सुबह,
मेरी हर शाम का सबसे हसीन एहसास हो तुम।
दुनिया की भीड़ में जब मैं खुद को तन्हा पाता हूँ,
मेरे हाथों को थाम लेने वाला विश्वास हो तुम।

मेरे हर दर्द को बिना कहे समझ लेते हो,
मेरी ख़ामोशी की सबसे प्यारी आवाज़ हो तुम।
जो दुआओं में बरसों से माँगा था मैंने रब से,
उसी दुआ का मिला हुआ अनमोल इनाम हो तुम।

अगर मेरी ज़िंदगी एक अधूरी कहानी है,
तो उस कहानी का सबसे खूबसूरत अध्याय हो तुम।
मेरी बंजर ज़िंदगी में खिलता हुआ इकलौता गुलाब हो तुम,
और इस दिल की धड़कनों का सबसे प्यारा ख़िताब हो तुम। 🌹❤️✨



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