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भाविक भावी

Romance

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भाविक भावी

Romance

मेरा पथ

मेरा पथ

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मेरा पथ उस बवण्डर में जा चुका है 

जिसमें तुम गुम-सुम सी बैठी हो, 

उस अंधियारे मुख के बाहर रुखसत है 

जिसे तुम कल्पना का नाम देती हो।


बता दो, उन सुनसान राहों से गुजरे कैसे 

जिस पथ पर हमने-तुमने स्वप्न संजोये हो, 

नादान उन स्वप्न को फिर से संजोने में 

क्यूँ तुम मेरा इम्तिहान ले रही हो।

 

बेशक हमने ही कोई गलती की है

इस वजह से राह मुश्किल कर चली हो,

पर उन हँसी पलो को यूँ न ले जाओ 

जिसमें तुम्हारी रूह बसी हो।


पूरी तरह बदलने के बाद भी

क्यूँ मुझसे बात नही करती हो,

हरदिन हरपल यादों में आकर

न जाने कितने सितम ढाती हो।


तुम्हे देखने के इंतज़ार में हमे

रात-रातभर आँख नही आती है,

सदियों से बंद आँखों में आती हो

कभी हकीकत में भी आया करो।


एक दिन आँख खुलने पर तुम्हें पाऊ

बरसात में बातें कर तुम्हे रिझाऊ,

तुम्हारी गोद मे सर रखकर

बस! तुम्हें ही तकता जाऊ।


बंद पड़ी जीवन रूपी घड़ी को

मिलन के बहाने शुरू करो,

एक न एक दिन जरूर आना

मुझे जगाना, मुझे सताना।


इश्क़ सफ़र में मिलने की

आख़री ख्वाहिश है हमारी,

इस जन्म में भले ही न मिली

अगले जन्म में तुम्हे ही पाऊ।


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