STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

3  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

मेरा फूल

मेरा फूल

1 min
361

मेरी हर गम के शूल का वो है फूल

बिना उसके ये जिंदगी है फिजूल

वो कहे तो हंसते हंसते ज़हर पी लूं

मेरे गम के दरिया का वो है पूल

उसे हरपल ही दिल मे देखता रहूं,

उसे देखते देखते ही मौत हो जाये

बस यही है मेरा आखरी वसूल

मेरी निगाह में सदा बस

उसका ही अक्स हो,

फ़िर तो इस साखी को ,

मौत का आईना भी है क़बूल

दिल से विजय



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract