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Minal Aggarwal

Inspirational

4  

Minal Aggarwal

Inspirational

मेरा जन्मदिन था और मैं

मेरा जन्मदिन था और मैं

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मेरा जन्मदिन था और 

मैं ही अकेली उसे मना 

रही थी 

मेज पर 

अपने ही हाथ से बना केक और 

उस पर मोमबत्तियां सजा रही थी 

माचिस की डिब्बी से तिल्ली 

निकालकर 

उसे जलाकर फिर 

मोमबत्तियों को भी 

एक एक करके जला रही थी 

एक मोमबत्ती को छोड़ 

फूंक मारकर 

बाकी सबको बुझा रही थी 

खुद ही काटकर केक 

उसका एक टुकड़ा अपने मुंह में 

डाल रही थी 

उसका स्वाद बेमिसाल था 

मेरी ही तरह 

अकेलेपन का अहसास नहीं था 

मुझे 

अपने जन्मदिन के जश्न में 

मैं थी दिलो जान से शामिल 

उसे मैं पूरे उत्साह से 

भरपूर होशो हवास में बना रही थी 

गुब्बारे भी फुलाये थे मैंने 

रंग बिरंगी कागज की 

कतरनों के साथ 

धागे से बांधकर 

दीवारों पर 

खिड़की पर 

फर्नीचर पर और 

यहां वहां सारे घर के कमरों में 

सजाये थे मैंने 

एक एक करके फोड़ डाले थे 

फिर सब मैंने 

दीवाली की रात हो जैसे 

पटाखों की तरह फोड़कर 

खूब शोर शराबे और 

धूम धड़ाके के साथ 

घर के आंगन में 

ढेर सारे दीये भी जलाये थे 

मैंने 

भांति भांति के पकवान भी 

सुबह से रसोई घर में 

लगकर बनाये थे मैंने 

इंतजार था कि कोई आये तो 

उसे भी शरीक कर लूं 

अपनी खुशी में 

तैयारी हमेशा की तरह ही 

पूरी थी 

मां बाप की तस्वीर साथ थी 

भगवान का था सिर पर 

हमेशा की तरह ही आशीर्वाद 

जन्मदिन का शुभ अवसर तो 

दिल में एक बच्चों सी उमंग पैदा 

कर देता है फिर 

समय चाहे 

अनुकूल हो या 

प्रतिकूल 

कोई अकेला हो या 

भीड़ के बीच 

कोई फर्क नहीं पड़ता 

जब तक कोई खुद को न समझे 

अकेला या कमजोर तो 

वह कभी अकेला या कमजोर है ही 

नहीं 

वह सर्वगुण संपन्न एक 

सर्वशक्तिमान व्यक्ति है 

मेरी ही तरह 

यही तो प्रभु का मुझे आशीर्वाद है 

उनकी कृपा है 

मेरे जन्मदिन पर प्रदत्त यही तो 

उनके द्वारा दिया उपहार है 

यह परोपकार यूं ही आजीवन 

बना रहे 

यही आज के शुभ दिन मेरी 

प्रभु से गुजारिश है।


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