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anju Singh

Tragedy

4  

anju Singh

Tragedy

मेरा गाँव

मेरा गाँव

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नदी, पगडंडी ,वो पीपल की छाँव ,

खेत ,बगीचे ,कौए की काँव काँव ,

अब कहां मिलता है?

गाँव का वो कुँआ ,

कुएँ की पनघट ,बैलों की रेहट ,

पनीहारीन की जमघट ,

अब कहां मिलता है ?

नदियों की कल कल ,

घुंघरूओ की खन खन

 अब कहां मिलता है ?

,गाँव की चौपाल बुजुर्गों का सम्मान

 वसुधैव कुटुम्बकम् की पहचान 

मेहमानों का स्वागत 

,माँ बहनों की इज्जत  

अब कहाँ मिलता है ?

गन्ने की वो पोरी ,

आमों की कच्ची कौरी ,

गुड़ की सोंधी महक ,

धुल भरी वो सड़क

 अब कहां मिलता है ?

गाँव की वो होली ,

मित्रों की वो टोली ,

भौजाईयों की ठीठोली 

अब कहां मिलता है ?

वो बचपन की यादें ,

तेरे कसमे वादे ,

संग जीने -मरने की फरियादे ,

शेष बचा है मन मे भूली बिसरी यादें ।

बढ़ी समझ तो इसने 

सबकुछ हम से छिन लिया ,

खुशियों ने जैसे हमसे मुँह 

मोड़ लिया ।

आधुनिकता की वेदी पर हमने इन्हें कुर्बान किया ,

क्या यह सच है ,अंग्रेजी शिक्षा ने हमे महान किया ?



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