मेरा गाँव
मेरा गाँव
नदी, पगडंडी ,वो पीपल की छाँव ,
खेत ,बगीचे ,कौए की काँव काँव ,
अब कहां मिलता है?
गाँव का वो कुँआ ,
कुएँ की पनघट ,बैलों की रेहट ,
पनीहारीन की जमघट ,
अब कहां मिलता है ?
नदियों की कल कल ,
घुंघरूओ की खन खन
अब कहां मिलता है ?
,गाँव की चौपाल बुजुर्गों का सम्मान
वसुधैव कुटुम्बकम् की पहचान
मेहमानों का स्वागत
,माँ बहनों की इज्जत
अब कहाँ मिलता है ?
गन्ने की वो पोरी ,
आमों की कच्ची कौरी ,
गुड़ की सोंधी महक ,
धुल भरी वो सड़क
अब कहां मिलता है ?
गाँव की वो होली ,
मित्रों की वो टोली ,
भौजाईयों की ठीठोली
अब कहां मिलता है ?
वो बचपन की यादें ,
तेरे कसमे वादे ,
संग जीने -मरने की फरियादे ,
शेष बचा है मन मे भूली बिसरी यादें ।
बढ़ी समझ तो इसने
सबकुछ हम से छिन लिया ,
खुशियों ने जैसे हमसे मुँह
मोड़ लिया ।
आधुनिकता की वेदी पर हमने इन्हें कुर्बान किया ,
क्या यह सच है ,अंग्रेजी शिक्षा ने हमे महान किया ?
