Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!
Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!

Sonia Chetan kanoongo

Inspirational


3  

Sonia Chetan kanoongo

Inspirational


मेरा देश, मेरी भाषा

मेरा देश, मेरी भाषा

1 min 59 1 min 59

ख़ुद हिंदी का बखान करती हो,और मुझे अंग्रेजी का ज्ञान देती हो।

जब इतना प्यार है अपने वतन की भाषा से,

तो मुझे क्यों विदेशी बनाने में योगदान देती हो

आश्चर्य से देखा,अपने अक्स को कहते हुए।


ताउम्र गुजारी मैंने अपनी भाषा को पिरो कर,

हर गीत में ,हर ग्रन्थ में अपना सर झुका कर,

माँ की लोरियों में भी ,अपनी भाषा को संजोया है,

फिर आज क्यों,खुद को बेबस बनाया है।

अपनी ही संतान को विदेशी भाषा का गुलाम बनाया है।


क्या गुण नही है मेरी भाषा में, फिर क्यों मेरे देश पर अंग्रेजों का शासन छाया है,

हर कोई भीड़ का हिस्सा बना है, मैंने भी तो बच्चो को बनाया है।

ये अपमान खुद मैंने अपनी भाषा पर लगाया है,

देर से ही सही पर ये , ज्ञान मुझे मेरे बच्चे ने बतलाया है।

जिस देश की मैं वासी हूँ, उस देश की भाषा सिखाऊंगी।

हर कोई गर्व करेगा तुम पर, तुम्हे ऐसा इंसान बनाऊँगी।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Sonia Chetan kanoongo

Similar hindi poem from Inspirational