STORYMIRROR

Bikramjit Sen

Abstract

2  

Bikramjit Sen

Abstract

मौत

मौत

1 min
65


 

गम का बादल ओढ़ के

वो खड़ा था

मैं नादान कहाँ 

समझ पाता

ओढ़ा  दिया उसने मुझे 

कफ़न में गाड़ दिया 

उसने मुझे  

मौत यूँ ही नहीं आती सबको 

कभी बैठे हो मौत के इंतज़ार में 

कभी किया है बातें मौत से

गिरे, बरसों उसके प्यार में. 

 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract