"मौत"---एक सच्चाई
"मौत"---एक सच्चाई
मौत! तू एक सच्चाई है
तुझे हर इंसान की ज़िन्दगी का दुश्मन बनकर आना है,
और तू हमेशा आयी है।
तेरा और ज़िन्दगी का साथ बड़ा गहरा है,
हर इंसान के लिए तू एक मुश्किल और ज़िन्दगी सहरा है।
हर पैदाइश की ख़ुशी में मौत की परछाईं जुड़ जाती है,
हर ग़म-ओ-दर्द सहने के बाद मौत ही तो आती है।
ऐ मौत! तेरे बिना तो ज़िन्दगी झूठी है,
अगर तू वक़्त से पहले आ जाए तो क़िस्मत रूठी है।
हर इंसान की ज़िन्दगी में तेरी ख़ास जगह है,
तू जो न आये तो इस दुनिया में रहना भी एक सजा है।
किसी को मौत देना तो ख़ुदा का काम होता है,
पर किसी बेगुनाह को मौत देते वक़्त क्या ख़ुदा सोता है.....!
उस ख़ुदा से मुझे एक नहीं बहुत-सी शिकायत है,
वो मेरे अपनों के ग़म-ओ-अश्क मुझे देकर मौत दे दे बस... यही गुज़ारिश है ।
