STORYMIRROR

Pratik Tarsekar

Abstract Drama Romance

3  

Pratik Tarsekar

Abstract Drama Romance

मौसम की पुकार

मौसम की पुकार

1 min
212

यह मौसम को ऐसे ही रहने दो

इसमें कोई याद आता है

आज भी तुम्हारी यादों में

तुम्हारी इलायची वाली चाय बनाता है

चाय पी के तुम बोलते 

क्या जिंदगी भर बना पाओगे 

ऐसे ही सच्ची मुस्कान

मेरे चेहरे पर ला पाओगे

डरता था मन मेरा क्या वादे मैं निभा पाऊंगा

पता था मुझे एक दिन काफी दूर चले जाऊंगा

पता था मुझे दिल का रुठा

आवाज नहीं आया, मगर दिल हमारा भी बहुत टूटा

कुछ तो मजबूरियां हमारी भी होंगी  

नहींं तो आपके इश्क में, कविताएं नहीं लिखी होती 

आज भी तुम्हारा दिल मेरे लिए दुआ मांगता है

मौसम ने बताया मुझे, यह बेईमान मौसम सब जानता है

  

 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract