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Pushpak Kumar

Classics Children

4.5  

Pushpak Kumar

Classics Children

मैं कौन हूँ?

मैं कौन हूँ?

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मैं आपका सम्मान हूँ, मैं आपका अभिमान हूँ।

मैं आपकी आँखों का तारा हूँ, आपका दुलारा हूँ।

मैं आपका आज्ञाकारी राम हूँ, मैं नटखट श्याम हूँ।

मैं बुढ़ापे का लाठी हूँ, आपका जीवन साथी हूँ।


मैं आपका विश्वास हूँ, मैं आपका अधूरा श्वास हूँ।

मैं आपका हर्ष भी हूँ, मैं आपका अश्र भी हूँ।

मैं आपका शीतल छाव हूँ, मैं आपके जीवन का पड़ाव हूँ।

मैं आपके ख्वाबों को पूरा करता किरण हूँ,

मैं आपका ही तो दर्पण हूँ।


                                          ~ माता-पिता के चरणों में अपने 

                                              आप को ढूंढता एक वैरागी🙏


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